Thursday, December 8, 2022
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Forgetfulness – Veer Savarkar

" Memory remains appropriate for man or society, but in reality, like memory, forgetfulness is also a divine grace. Some memories...

First Pageless History – Veer Savarkar

“ A tattered English book kept on the same rack had left a lasting impression on my mind. That book was A...

वीर सावरकर ने वक्तृत्व-कला कैसे सीखी ?

“ जब मैं छोटा था, तभी मेरी भाषण-प्रवृत्ति के पौधे में पहले चुल्लू भर पानी डालने की दया नासिक की उपरोक्त प्रतियोगिता ने...

What will decide the path of nation’s progress? Shastra or Reason ?

“Moving forward, if we want to determine whether a discussion is good or bad, or whether a reform is needed or not, we should...

सत्य सनातन धर्म कौन सा ? – वीर सावरकर

सत्य सनातन धर्म कौन सा ? वर्तमान में चल रहे सामाजिक तथा धार्मिक आंदोलनों के दंगल में, सुधारक अर्थात् जो सनातन धर्म का उच्छेद करना...

वज्रसूची

वज्रसूची 'फलान्यथौदुंबरवृक्षजातेः मूलाग्रमध्यानि भवानि वापि। वर्णाकृतिः स्पर्शरसैस्समानि तथैकतो जातिरिति चिंत्या ॥१॥ तस्मान् गोऽश्ववत्कश्चित् जातिभेदोऽस्ति देहिनाम् । कार्यभेदनिमित्तेन संकेतः कृत्रिमः कृतः ॥ २ ॥' (भविष्य पुराण, अ. ४०) बौद्ध धर्म के...

आंध्रप्रांतीय भारतवीर श्रीराम राजू

आंध्रप्रांतीय भारतवीर श्रीराम राजू  जी की यह जीवनी वीर सावरकर जी द्वारा लिखित है। आंध्रप्रांतीय भारतवीर श्रीराम राजू बुरे दिनों में सद्गुणों की भी निंदा...

सावरकर और भगतसिंह की याचिका में फर्क , जो ‘ The Wire ’ समझ...

' The wire ' ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर और हुतात्मा भगतसिंह इनके आवेदनोपर एक लेख जारी किया था , जिसका उद्देश सावरकर जी की उपेक्षा करना था ।

राष्ट्र का अर्थ ।

जो हो गए वे पुरखे (पूर्वज) और आगे आनेवाली संतति-वंशज, इनसे परंपरा से, प्रेम से, धर्म से, इतिहास से, बँधा हुआ जो समुदाय है उसका नाम राष्ट्र है।
what is hindutva

हिंदुत्व – भूमिका तथा मूलतत्त्व

प्रस्तुत लेख वीर सावरकर जी की पुस्तक 'हिंदुत्व' , 'हिन्दू राष्ट्र दर्शन' और 'हिंदुत्व के पांच प्राण' से लिए गए हैं , इन्हे पढ़...

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Jayostute Poem with Hindi and English translation

जयोस्तुते श्रीमहन्मंगले ! शिवास्पदे शुभदे स्वतंत्रते भगवती ! त्वामहं यशोयुतां वंदे राष्ट्राचे चैतन्य मूर्त तू नीती-संपदांची स्वतंत्रते भगवती ! श्रीमती राज्ञी तू त्यांची परवशतेच्या नभात तूची आकाशी होसी स्वतंत्रते...