Saturday, August 6, 2022
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सत्य सनातन धर्म कौन सा ? – वीर सावरकर

सत्य सनातन धर्म कौन सा ? वर्तमान में चल रहे सामाजिक तथा धार्मिक आंदोलनों के दंगल में, सुधारक अर्थात् जो सनातन धर्म का उच्छेद करना...

वज्रसूची

वज्रसूची 'फलान्यथौदुंबरवृक्षजातेः मूलाग्रमध्यानि भवानि वापि। वर्णाकृतिः स्पर्शरसैस्समानि तथैकतो जातिरिति चिंत्या ॥१॥ तस्मान् गोऽश्ववत्कश्चित् जातिभेदोऽस्ति देहिनाम् । कार्यभेदनिमित्तेन संकेतः कृत्रिमः कृतः ॥ २ ॥' (भविष्य पुराण, अ. ४०) बौद्ध धर्म के...

आंध्रप्रांतीय भारतवीर श्रीराम राजू

आंध्रप्रांतीय भारतवीर श्रीराम राजू  जी की यह जीवनी वीर सावरकर जी द्वारा लिखित है। आंध्रप्रांतीय भारतवीर श्रीराम राजू बुरे दिनों में सद्गुणों की भी निंदा...

सावरकर और भगतसिंह की याचिका में फर्क , जो ‘ The Wire ’ समझ...

' The wire ' ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर और हुतात्मा भगतसिंह इनके आवेदनोपर एक लेख जारी किया था , जिसका उद्देश सावरकर जी की उपेक्षा करना था ।

राष्ट्र का अर्थ ।

जो हो गए वे पुरखे (पूर्वज) और आगे आनेवाली संतति-वंशज, इनसे परंपरा से, प्रेम से, धर्म से, इतिहास से, बँधा हुआ जो समुदाय है उसका नाम राष्ट्र है।
what is hindutva

हिंदुत्व – भूमिका तथा मूलतत्त्व

प्रस्तुत लेख वीर सावरकर जी की पुस्तक 'हिंदुत्व' , 'हिन्दू राष्ट्र दर्शन' और 'हिंदुत्व के पांच प्राण' से लिए गए हैं , इन्हे पढ़...

वैदिक धर्म को ही हिंदू धर्म मानना एक भूल है

प्रस्तुत प्रबंध की मर्यादाओं का विचार करने पर यह प्रतीत होता है कि हिंदू धर्म के आवश्यक लक्षण कौन से हैं। इसी विषय पर...

हिंदू धर्म में कई धर्म-पद्धतियों का अंतर्भाव होता है

हिंदू धर्म का अर्थ है-हिंदुओं का धर्म और जहाँ तक सिंधु शब्द से बने 'हिंदू' शब्द का मूल अर्थ सिंधु से सिंधु तक अर्थात्...

हिंदू धर्म से ‘हिंदू’ की परिभाषा करना अनुचित

हिंदुत्व तथा हिंदू धर्म- ये दोनों ही शब्द हिंदू शब्द से उत्पन्न हुए हैं। अतः उनका अर्थ 'सारी हिंदूजाति' ऐसा ही किया जाना आवश्यक...

‘हिंदुइज्म’ शब्द के कारण उत्पन्न अस्तव्यस्तता

हिंदू तथा हिंदुस्थान- ये विदेशियों द्वारा हमें दिए गए नाम हैं, ऐसा सोचकर इन नामों पर जो आक्षेप किए जाते हैं, उनका खंडन कुछ...

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Jayostute Poem with Hindi and English translation

जयोस्तुते श्रीमहन्मंगले ! शिवास्पदे शुभदे स्वतंत्रते भगवती ! त्वामहं यशोयुतां वंदे राष्ट्राचे चैतन्य मूर्त तू नीती-संपदांची स्वतंत्रते भगवती ! श्रीमती राज्ञी तू त्यांची परवशतेच्या नभात तूची आकाशी होसी स्वतंत्रते...