‘हिंदुराष्ट्र’ क्या है ?

'हिंदुराष्ट्र' क्या है ? क्या हिंदुराष्ट्र अर्थात भौगोलिक सीमा में बंधित भारत है ? सावरकर हिंदुराष्ट्र प्रस्थापित करना चाहते थे ? जानते है !

hindu rashtra kya hai

‘हिंदुराष्ट्र’ क्या है ? क्या हिंदुराष्ट्र ‘बनाना’ है ? क्या हिंदुराष्ट्र अर्थात भौगोलिक सीमा में बंधित भारत है ? सावरकर हिंदुराष्ट्र प्रस्थापित करना चाहते थे ? हिंदुराष्ट्र स्थापित करने की वस्तू है ? क्या हिंदुराष्ट्र संकुचित मानसिकता का है ?  आइये जानते है वीर सावरकर  के शब्दों में ।

  • ‘ हिंदू स्वयंमेव एकराष्ट्र है ‘

    १ ) हिंदुओं को हिन्दुस्थान नामक एक अद्वितीय पितृभूमी है ; जिससे उनकी उत्पत्ति और विकास हुआ ।

    २ ) जो आज भी उनके शास्त्रों और साहित्य की सामान्य भाषा और प्राचीन धर्मशास्त्र और उनके पूर्वजों की बातों में सबसे पवित्र मानी जाती है , वह ‘ संस्कृत ’ जो महिमामंडित है , वह सामायिक भाषा है ।

    ३ ) मनु के समय से ही इनका वंश और रक्त अनुलोम और प्रतिलोम विवाहों के योग से निरन्तर मिलता रहा है ।

    ४ ) वैदिक ऋषीमुनि उनके समान गौरव हैं । पाणिनि और पतंजलि उनके व्याकरणविद् हैं , भवभूति और कालिदास उनके कवि हैं , श्रीराम और श्रीकृष्ण , शिवाजी और प्रताप , गुरु गोबिंद और बंदा उनके नायक हैं । बुद्ध और महावीर , कणाद और शंकराचार्य उनके प्रसादिक पुरुष और दार्शनिक समान रूप से सम्मानित हैं ।

    ५ ) इनका प्राचीन और आधुनिक इतिहास एक ही है । उनके मित्र और शत्रु एक ही है ।

    देखें : हिन्दू की परिभाषा 

  • क्या हिंदुराष्ट्र संकुचित मानसिकता है ?

    जब तक कोई राष्ट्र अपने विशेष राष्ट्र या जाति के न्यायसंगत और मौलिक अधिकारों को अन्य लोगों और अन्य मानव समूहों के बलात्कार और मनमाने अतिक्रमण से बचाने का प्रयास करता है , और वह राष्ट्र या वह जाति समग्र रूप से एक छोटा संघ है , जब तक कि वह दूसरों के समान और न्यायपूर्ण अधिकारों और स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करता है ; ऐसे शुद्ध कारण से उसकी निंदा या तिरस्कार नहीं किया जा सकता है । उनका राष्ट्रवाद या जातिवाद मानवता के लिए तभी हानिकारक है जब एक राष्ट्र या जाति आक्रामक रूप से दूसरे राष्ट्रो के न्याय अधिकारों को नष्ट करने के लिए बाधित होता है । राष्ट्रवाद या जातिवाद जायज है या नहीं , यह तय करने की यह परीक्षा है ।

  • भारत में दो विरोधी राष्ट्र एक साथ रह रहे हैं ।

    सच्चाई यह है कि तथाकथित जातीय प्रश्न हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सदियों से चली आ रही सांस्कृतिक , धार्मिक और राष्ट्रीय दुश्मनी की विरासत मात्र है । सही समय आने पर आप उस समस्या का समाधान कर सकते हैं : लेकिन आप उनके अस्तित्व को नकार कर उन्हें दबा नहीं सकते । किसी गहरी बीमारी को दुर्लक्षित करने की तुलना में उसका निदान और उपचार करना अधिक सुरक्षित है । हमे उस अप्रिय तथ्य का साहस के साथ सामना करना चाहीये । आज यह मान लेना संभव नहीं है कि हिंदुस्तान एक एकीकृत और एकजातीय राष्ट्र है । लेकिन इसके विपरीत , भारत में दो मुख्य राष्ट्र हैं , हिंदूराष्ट्र और मुस्लिमराष्ट्र ।

  • क्षेत्रीय एकता अर्थात राष्ट्रीय एकता नही ।

    अलग – अलग धार्मिक , जातीय , सांस्कृतिक और अन्य संबद्धता रखने वाले लोगों को केवल क्षेत्रीय एकता द्वारा राष्ट्रीय नहीं बनाया जा सकता है । धार्मिक , जातीय , सांस्कृतिक , भाषा या ऐतिहासिक , संबंध ही है जो लोगों को महसूस कराती है की हम एकराष्ट्र है ; यह सच्चाई केवल राजनीतिक नहीं है ; तो , यह ज्यादातर मानवीय भी है । और वैसे भी भारतभूमी ऐतिहासिक दृष्टीसे भी हिंदुओ की ही पितृभूमी रह चुकी है , इसिलीये इस भूमिसे सर्वप्रथम हिंदुओका ही घनिष्ट संबंध है । याने हिंदूरराष्ट्र यह क्षेत्रीय न होकार धार्मिक , सांस्कृतिक , जातीय और ऐतिहासिक एकता की संकल्पना है ।

    यह भी पढ़ें : स्वातंत्र्यवीर सावरकर का ‘हिंदी’ राष्ट्र !

  • हिंदू का मत हिंदुराष्ट्र के विकासहेतू ।

    हिंदू होनेपर क्षमाप्रार्थी या लज्जित होने की प्रवृत्ति को समाप्त करें ; हममें से बहुतों को यह कहते हुए शर्म आती है कि हम हिंदू हैं , जैसे कि हिंदू कहना कुछ गैर – राष्ट्रीय है ; या श्री राम और श्रीकृष्ण , शिवाजी और प्रताप और गोविंद सिंह की परंपरा में पैदा होना बहुत बड़ी शर्म की बात है ! इस सौरमंडल में हमारे हिंदुओं का भी अपना देश होना चाहिए . संगठन उठाओ । मुसलमान केवल उन्हीं को मत देते हैं जो स्पष्ट और साहसपूर्वक उनकी सुरक्षा की हामी देते हैं और मुसलमानों को अधिक अधिकार , यहां तक कि अतिक्रमण करने भी देते है । लेकिन हम हिंदू हैं ‘ हम हिंदू नहीं मुस्लिम नहीं ‘ ऐसा जो खुले तौर पर घोषणा करते हैं ; फिर भी , मुस्लिम संगठनों को मान्यता देकर उनके साथ व्यवहार करने में , उन्हें कभी परेशानी नही होती है , और हिंदुओं के नाम पर , वे ऐसे समझौते करते हैं जो हमेशा हिंदुओं के हितों के लिए हानिकारक होते हैं ; उसे मत देना आत्मघाती गलती है ! आपको अब उन लोगों को मत देना चाहिए जिन्हें हिंदू होने पर शर्म नहीं आती । जो खुलेआम हिन्दुओं के लिए खड़ा होगा उसे ही हम मत देंगे ।

  • हिंदी मुसलमानों की शत्रुतापूर्ण वृत्ती ।

    १ ] सामान्य तौर पर , सभी और विशेष रूप से हिंदी मुसलमान राज्य के बारे में अति धार्मिकता और भोले विचारों को छोड़ने के लिए अद्ययावत नहीं हो पाए हैं ।

    २ ] उनके धार्मिक दर्शन और कुरान की राजनीति का संयोजन , मानव जगत को दो भागों में विभाजित करता है । एक है मुसलमानों की भूमि और दूसरी हे शत्रुओं की भूमि । मुसलमानों द्वारा शासित सभी क्षेत्र मुस्लिम भूमि हैं । गैर – मुसलमानों द्वारा शासित या गैर – मुसलमानों द्वारा शासित सभी भूमि दुश्मन की भूमि है । और किसी भी वफादार मुसलमान को इस भूमि के प्रति कोई निष्ठा नहीं रखनी चाहिए । इतना ही नहीं , उन्होंने गैर – मुसलमानों को भी चुनौती दी है कि वे बलात्कारसे या युक्तिसे इस्लाम के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं उसका उपयोग करके इस्लाम में परिवर्तित किये जायेंगे , और एक मुस्लिम राष्ट्र स्थापित किया जायेगा । इस कथन के विपरीत , मुस्लिम पुस्तक में अजीब बाक्यों को सामने रखने का कोई मतलब नहीं है । कुरान पढ़ें और सद्यस्थिती देखे , तो उन किताबों के अनुयायी कैसे व्यवहार में उनका अनुकरण कर रहे हैं ; यहीं मायने रखता है ।

    ३ ) मुसलमानों के लिए , हिंदू पूरी तरह से ‘ काफिर ‘ हैं ! निःसंदेह ‘ हिन्दुस्तान ’ हिंदुओकी ज़मीन है , जब तक मुस्लिम शासन शुरू नहीं हुआ है या सभी हिंदुओं ने इस्लाम धर्म नही अपना लिया है , तब तक यह मुख्य रूप से ‘ शत्रु भूमि ‘ है ! यह हिंदी मुसलमानों का धार्मिक प्रवृत्ती है जो अभी भी अंध धर्मनिष्ठा का पालन कर रहे हैं । वे इसे पहले से ही एक विदेशी भूमि , एक शत्रु भूमि के रूप में समझते हैं । ” दार – उल – हरब ! ” समझते है ‘ दार उल – इस्लाम ‘ नहीं !

    ४ ) उनके अनुसार उनकी राजनीतिक और सांस्कृतिक मानसिकता भी मुख्य रूप से हिंदू विरोधी है । उन्होंने एक विजेता के रूप में भारत में प्रवेश किया और उसने हिंदुओं को भी अपने शासन में लाया , वे इस बात से पूरी तरह स्मृति संपन्न हैं । पर एक बात पूरी तरह से भूल जाते है जो है उनका पराभव ! हिंदू इस तथ्य को कभी नहीं भूलेंगे कि उन्होंने उन्हें सैकड़ों युद्ध के मैदानों में अच्छी तरह से उड़ा दिया और सभी हिंदुस्तान को मुसलमानों के जुए से मुक्त करके ‘ हिंदुपदपशाही ’ की स्थापना की ।

  • यदि हिंदू राष्ट्रवादी को कोई हिंदू जातिवादी कहता हैं , तो उन्हें बिल्कुल भी क्षमाप्रार्थी नहीं होना चाहिए ।

    जर्मन जर्मनी में एक राष्ट्र हैं । और यहूदी एक समुदाय ( COMMUNITY ) हैं । तुर्की एक तर्कसंगत राष्ट्र और उसके अरब अल्पसंख्यक हैं ; या आर्मेनियन वहां एक जाती हैं । इसी तरह , भारत में हिंदू राष्ट्र ( NATION ) हैं ; और मुस्लिम अल्पसंख्यक एक समुदाय बनकर रह रहे है । यदि राष्ट्रवाद आक्रामक प्रकृति का है , तो यह मानवीय संबंधों में उतना ही अनैतिक है जितना कि जातिबाद में , जो दूसरों के न्यायसंगत अधिकारों को हड़पना चाहता है ! लेकिन अगर जातीवाद केवल सुरक्षात्मक है , तो यह मानवतावाद की तरह ही स्वीकारार्ह और न्यायसंगत है । हिंदू राष्ट्र का उद्देश किसी अन्य के अधिकारो का अपहरण या उसे नेस्तनाबूत करने का नहीं है । इसलिए , यदि हिंदू अपनी भूमि में अपने न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं , और यह जातिवाद है ; तो हमारे पास जातीवादी होने का वह सबसे अच्छा गुण है । और इसलिए यह हमारे लिए सबसे वफादार हिंदू जातिवादी होने का एक अलंकरण है , क्योंकि हमारी राय में ऐसा जातिवाद एक सच्ची और बहुत ही न्यायपूर्ण राष्ट्रीयता है ।

    (सूचना- यहा ‘जाती’ शब्द का अर्थ ‘संप्रदाय’ या ‘समुदाय’ निहित है। )


  • निष्कर्ष

    हिंदुराष्ट्र भौगोलिक नहीं । संकुचित नहीं ।यह एक ‘राष्ट्र’ कहा जानेवाला समुदाय है । यह हिंदुत्व के आधार पर खडा हुआ हिंदुराष्ट्र है । भारत भूमी है , देश है। राष्ट्र नहीं। हिंदुस्थान हिंदुओकी भूमी है , मातृभूमी और पितृभूमी है । हिंदुस्थानपर हिंदुओका ही अधिकार है, हिंदुराष्ट्रका ही अधिकार है। हिंदुराष्ट्र स्थापन करने की वस्तू नहीं, यह स्वतः हिंदुस्थान मै अस्तित्व रखता है ।

    हिंदुराष्ट्र आज समाज में एक भावना है कि हम भारत में हिंदू राष्ट्र की स्थापना करना चाहते हैं । क्या इसका अर्थ यह है की आज हिंदुराष्ट्र अस्तित्व मे नहीं है ? मूल रूप से यह हिन्दू समाज , जो प्राचीन काल से जीवित है , अपने आप में एक हिन्दू राष्ट्र है और यह अन्य मुस्लिम , ईसाई , पारसी आदि जातियों के साथ हिंदुस्थान में रह रहा है । अनेक संगठनों का एक हिंदू राष्ट्र की स्थापना का सपना है । इसका सटीक अर्थ स्पष्ट नहीं है और उस कथित हिंदू राष्ट्र में अन्य धार्मिक लोगों के साथ क्या किया जाएगा ? यदि आप उन्हें इसमें स्थान देना चाहते हैं , तो इसे हिंदू राष्ट्र के बजाय हिंदी राष्ट्र कहना उचित होगा , क्योंकि इसमें आपको अन्य धर्मों को समान अधिकार देना होगा । और अगर उन्हें जगह नहीं देनी है , तो हिंदुओंको उनके अधिकरोको पददलित करना पडेगा जो कि एक राष्ट्र के रूप मै असंभव है । इसलिए हिंदुओं के लिए यह बेहतर है कि वे कथित हिंदू राष्ट्र की स्थापना आदि की मृगतृष्णा के पीछे भागे बिना अपने हिंदू राष्ट्र की समृद्धि को महत्व दें । हिंदुस्थान हिंदुओ की ही भूमी है , हिंदुराष्ट्र का ही हिंदुस्थान पर  प्रथम अधिकार है, यह भी ध्यान रखे ।

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