पितृभू एवं पुण्यभू की परिभाषा – वीर सावरकर

‘पितृभू’ अर्थात् केवल वह भूमि नहीं जहाँ अपने माता-पिता का जन्म हुआ हो, ‘पितृभू’ तो उस भूमि को कहा जाता है कि जिसमें प्राचीन काल से एक परम्परा से हमारे पूर्वज निवास करते आये हैं । इस कथन पर कुछ लोगों द्वारा त्वरित ही यह शंका उठायी जाती है कि, ‘ चूंकि गत दो पीढ़ियों से हम अफ्रीका में रहते आये हैं, तो क्या फिर हम हिन्दू नहीं ? पर उनके इसी तर्क के कारण उनकी यह आशंका सतही सिद्ध होती है । भविष्य में समस्त पृथ्वी पर भी यदि हिन्दू अपनी बस्तियाँ स्थापित करें तो भी उसकी प्राचीन परम्परागत, जातीय एवं राष्ट्रीय पूर्वजों की पितृभू यह भारत भूमि ही होगी ।

‘पुण्यभू’ का अर्थ आंग्ल भाषा में Holy land इस शब्द के अर्थ से है। जिस भूमि में किसी धर्म का संस्थापक, ऋषि, अवतार या प्रेषित ( पैगम्बर ) प्रकट हुआ, उसने उस धर्म को उपदेश दिया, उसके निवास से उस भूमि को धर्म क्षेत्र का पुण्यत्व प्राप्त हुआ, वह उस धर्म की पुण्यभू है । जिस अर्थ में ज्यू या ईसाइयों की पेलेस्टाइन, मुसलमानों की अरेबिया पितृभू है उसी अर्थ में हमने पुण्यभू शब्द का प्रयोग किया है, केवल पुण्यभू इस अर्थ में नहीं ।

पितृभू एवं पुण्यभू शब्दों के इन पारिभाषिक अर्थों में यह आसिन्धु-सिन्धु भारत-भूमिका जिस-जिस व्यक्ति की पितृभूमि या पुण्य भूमि है वह प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है ।

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