Wednesday, January 26, 2022
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Monthly Archives: May 2021

Veer Savarkar’s Urdu Gazals | वीर सावरकर की उर्दू ग़ज़लें

हिंदोस्ताँ मेरा यही पाओगे मेहशरमें जबां मेरी, बयाँ मेरा मैं बंदा हिंदवाला हूँ, यह हिंदोस्ताँ मेरा मैं हिंदोस्ताँ के उजडे खंडहर का एक जरां हूँ यही सारा पता...

जैन-बौद्धों की अहिंसा गांधीजी की अहिंसा से भिन्न है ! – वीर सावरकर

बौद्धधर्म या जैनधर्म द्वारा प्रतिपादित अहिंसाधर्म, गांधीजी द्वारा प्रतिपादित उस आत्यन्तिक अहिंसाधर्म के सर्वथा विरुद्ध है। जो  सभी प्रकार की परिस्थितियों में सशस्त्र प्रतिकार...

किसे हिन्दू कहें और किसे अहिन्दू ? – वीर सावरकर

जो लोग श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त को प्रमाण मानते हैं वे 'सनातनी' कहलाते हैं । जो केवल श्रुति को ही प्रमाण मानते हैं वे 'वैदिक' कहलाते हैं...

पितृभू एवं पुण्यभू की परिभाषा – वीर सावरकर

'पितृभू' अर्थात् केवल वह भूमि नहीं जहाँ अपने माता-पिता का जन्म हुआ हो, 'पितृभू' तो उस भूमि को कहा जाता है कि जिसमें प्राचीन...

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Jayostute Poem with Hindi and English translation

जयोस्तुते श्रीमहन्मंगले ! शिवास्पदे शुभदे स्वतंत्रते भगवती ! त्वामहं यशोयुतां वंदे राष्ट्राचे चैतन्य मूर्त तू नीती-संपदांची स्वतंत्रते भगवती ! श्रीमती राज्ञी तू त्यांची परवशतेच्या नभात तूची आकाशी होसी स्वतंत्रते...